कैंसर के बारे में हमारे समाज में फ़ैले 10 मुख्य मिथक – Myths About Cancer

मई का महीना राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान माह [National Cancer Research Month] के रूप में जाना जाता है। इस महीने में वैज्ञानिकों की कैंसर रिसर्च को Highlight करने का प्रयास किया जाता है। ऐसे वैज्ञानिक जो कैंसर को समझने और उसका इलाज खोजने के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं। इस पोस्ट में हम कैंसर से जुड़े 10 मिथकों के बारे में बताएँगे, ताकि लोगों को गलत जानकारी के चक्रव्यूह से बचाया जा सके।

Myths About Cancer ॰ कैन्सर से जुड़ी भ्रांतियाँ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2020 में दुनिया भर में कैंसर के कारण 10 मिलियन लोगों की मौत हुई थी। आज के समय में कैंसर की बीमारी विश्व स्तर पर मौत की एक प्रमुख वजह बन चुकी है।

ऐसे मिथक विशेष रूप से समाज और सोशल मीडिया में फैलाई जा रही प्रचलित स्थितियों की वजह से बनते हैं, इसलिए कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि लोग अक्सर कैंसर को गलत समझते हैं।

Myths About Cancer
Myths About Cancer

“कैंसर” बीमारियों के समूह के लिए एक सामान्य शब्द है ,जो शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है। इसकी यही विविधता मिथकों के भ्रम की आग में घी डालने का काम करती है और लोग ग़लत बातों को भी सही मान लेते हैं। इस पोस्ट में हम कैन्सर से जुड़े कुछ मिथकों के बारे में आपको बताने वाले हैं। आइए जानते हैं – Myths About Cancer.

1. मोबाइल फोन कैंसर का कारण बनते हैं ?

आज तक, कोई सबूत नहीं है कि मोबाइल फोन कैंसर का कारण बनते हैं। इस मिथक के विकसित होने का एक कारण यह है कि ये उपकरण रेडियोफ्रीक्वेंसी विकिरण (रेडियो तरंगें) छोड़ते हैं, जो एक तरह का गैर-आयनीकरण विकिरण होता है और मानव शरीर इन विकिरण को अवशोषित करता है।

वैज्ञानिकों को इस बात की जानकारी है कि आयनीकृत विकिरण के संपर्क में से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, उदाहरण के लिए, एक्स-रे। हालांकि, मोबाइल से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी विकिरण गैर-आयनीकरण विकिरण होती है, जो कैंसर के जोखिम को नहीं बढ़ाती हैं।

कई अध्ययनों में रडार, माइक्रोवेव ओवन, सेल फोन और अन्य स्रोतों से निकलने वाली गैर-आयनीकरण विकिरण के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों की जांच की गई है, तो इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि गैर-आयनीकरण विकिरण से मनुष्यों में कैंसर का खतरा नही बढ़ता है।

2. कैंसर संक्रामक होता है ?

यह समाज में फैली एक कोरी कल्पना है। कैंसर किसी भी रूप में संक्रामक नहीं होता है। कैंसर का मरीज़ से यह बीमारी दूसरे लोगों में नही फैल सकती।

हालांकि, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) ट्रस्टेड सोर्स, हेपेटाइटिस बी और सी सहित कुछ यौन संचारित रोग, गर्भाशय ग्रीवा और यकृत में कैंसर का कारण बन सकते हैं। इन मामलों में, एक संक्रामक एजेंट कैंसर का कारण बनता है, लेकिन कैंसर स्वयं संक्रामक नहीं होता है।

3. बिजली की लाइनें कैंसर का कारण बनती हैं ?

यह भी एक मिथक है। बिजली लाइनों द्वारा उत्पादित बेहद कम आवृत्ति (ईएलएफ) चुंबकीय क्षेत्र गैर-आयनीकृत होते हैं और इसलिए ये कैंसर का कारण नहीं बनते हैं।

कई बड़े अध्ययनों ने चूहों पर ईएलएफ चुंबकीय क्षेत्रों के संभावित प्रभावों को देखा है। इनमें से अधिकांश अध्ययनों में किसी भी प्रकार के कैंसर के जोखिम में कोई वृद्धि नहीं हुई है। सच्चाई ये है कि, एलएलएफ विकिरण के संपर्क में आने वाले जानवरों में कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम वास्तव में कम था।

हालांकि, अमेरिकन कैंसर सोसाइटी यह भी बताती है कि कुछ अध्ययनों से उन बच्चों में ल्यूकेमिया के जोखिम में मामूली वृद्धि देखी गई है, जो बिजली लाइनों के करीब रहते हैं। हालाँकि, इसके कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हैं।

अभी तक हमारे पास कोई वास्तविक सबूत नहीं है कि सेल फोन या पावर लाइनें कैंसर का कारण बनती हैं। कई अन्य चीजें हैं जो हम रोजाना करते हैं जैसे – धूम्रपान और शराब का सेवन, ऐसी चीज़ें कैन्सर का जोखिम बढ़ा देती हैं।

4. कृत्रिम मिठास कैंसर का कारण बनती है ?

आज तक, इसका कोई सबूत नहीं मिला कि कृत्रिम मिठास से कैंसर होने का जोखिम बढ़ता है। कृत्रिम मिठास और कैंसर के बारे में सवाल तब उठे जब साकारीन और cyclamate से संयोजन से प्रयोगशाला के जानवरों में मूत्राशय का कैंसर हुआ। हालाँकि, आगे के अध्ययनों से मनुष्यों में कृत्रिम मिठास के कैंसर के साथ संबंध के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले।

इसी तरह, एक अध्ययन जिसमें आधा मिलियन से अधिक लोगों का डेटा शामिल था के द्वारा इस बात की पुष्टि की गई कि – saccharin जैसी कृत्रिम मीठा खाने और कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं होता।

5. कैंसर से मरीज़ की मौत निश्चित है ?

कैंसर होने से मौत होना ज़रूरी नही है। वैज्ञानिक कैंसर को बेहतर ढंग से समझने और उसका उपचार खोजने की लगातार कोशिश कर रहे हैं, यही वजह है की अब इस बीमारी से मौत होनी कम हो गई हैं।

उदाहरण के लिए, जनवरी 2019 में – अनुमानित 16.9 मिलियन लोग कैंसर से ठीक हो चुके थे। इसी तरह यूनाइटेड किंगडम में, जीवित रहने की दर पिछले 40 वर्षों में दोगुनी हो गई है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि कैंसर के प्रकार के आधार पर जीवित रहने की दर काफी भिन्न होती है। उदाहरण के लिए, UK में, वृषण कैंसर [Testicular Cancer] के लिए जीवित रहने की दर 98% है, जबकि अग्नाशय के कैंसर [Pancreatic Cancer] के लिए जीवित रहने की दर सिर्फ 1% ही है।

अमेरिका की ‘National Cancer Institute’ के अनुसार – “USA में, 1990 के दशक से कैंसर से मरने की संभावना लगातार कम हो रही है। पिछले 5 वर्षों में कुछ कैंसर, जैसे – स्तन, प्रोस्टेट और थायरॉयड कैंसर से जीवित रहने की दर 90% या इससे भी बेहतर है। पिछले 5 वर्षों में सभी कैंसर में संयुक्त रूप जीवित रहने की दर वर्तमान में लगभग 67% है।”

कुल मिलाकर, कैंसर की मृत्यु दर धीरे-धीरे कम हो रही है, हालांकि कुछ कैंसर में जीवित रहने की दर दूसरों की तुलना में अधिक बढ़ रही है।

6. कैंसर सर्जरी के कारण कैंसर फैलता है ?

यह केवल एक आंशिक मिथक है। यह सच है कि कैंसर की सर्जरी से कैंसर फैल सकता है, लेकिन यह दुर्लभ है। सर्जरी के दौरान उपयोग किए जाने वाले Advanced Equipments और Detailed Imaging Tests ने इस जोखिम को बहुत कम करने में मदद की है।

एक संबंधित मिथक ये भी है कि कैन्सर ट्यूमर हवा के संपर्क में आने पर तेजी से बढ़ने लगता है और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है। लेकिन यह पूरी तरह से असत्य है।

7. हर्बल दवाओं से कैंसर का इलाज हो सकता है ?

इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कोई भी हर्बल दवा कैंसर का इलाज कर सकती है। हालांकि, कुछ वैकल्पिक उपचार हो सकते हैं, जैसे कि एक्यूपंक्चर, ध्यान और योग लेकिन ये सिर्फ़ कैंसर से जुड़े मनोवैज्ञानिक तनाव दूर करने और कैंसर के उपचार के साइड इफ़ेक्ट्स को दूर करने में मदद करते हैं।

हर्बल दवाइयाँ भी नुक़सान करती हैं। अगर आप यह मान कर कोई हर्बल दवाई खाने लगे की यह तो हर्बल है, इससे नुक़सान नही होगा तो आप ग़लत है। कुछ परिस्थितियों में, हर्बल सप्लीमेंट भी किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कुछ अध्ययनों से पता चला है कि कावा (एक जड़ी-बूटी), जिसका उपयोग कुछ लोग तनाव दूर करने के लिए उपयोग करते हैं, इससे यकृत को नुकसान हो सकता है। इसी तरह सेंट जॉन पौधा, जिसका इस्तेमाल कुछ लोग अवसाद दूर करने के लिए करते हैं, कैंसर की दवाओं को बेअसर कर सकता है।

8. कैंसर एक आनुवंशिक बीमारी है?

कुछ कैंसर आनुवंशिक रूप से परिवारों के सदस्यों में हो सकते हैं, लेकिन ऐसे मामले बहुत कम ही आते हैं। दुनिया भर में होने वाले कैन्सर का केवल 3-10% ही आनुवंशिक होते हैं।

हालाँकि ऐसे परिवार के लोगों में कैंसर होने की संभावना अधिक होती है, जिनमें पूर्वज कैन्सर से पीड़ित थे। उम्र बढ़ने के साथ इसका Chance और बढ़ता है लेकिन यह मान कर चलना की आगे आने वाली पीढ़ी को कैन्सर आनुवंशिक रूप से मिलेगा ही पूरी तरह ग़लत है।

कैंसर के अधिकांश मामले जीन में उत्परिवर्तन के निर्माण के कारण होते हैं, जो समय के साथ जमा होते हैं। कुछ प्रकार के कैंसर कुछ परिवारों की आगे आने वाली पीढ़ी में हो सकते हैं, लेकिन अधिकांश कैंसर हमारे माता-पिता से विरासत में मिले जीन से स्पष्ट रूप से जुड़े नहीं होते हैं। जीन परिवर्तन जो किसी व्यक्ति के जीवन के दौरान एकल कोशिका में शुरू होता है, सबसे अधिक कैंसर का कारण बनता है।

9. कैंसर ठीक होने के बाद दोबारा होता है ?

सौभाग्य से हम सभी के लिए, यह कथन एक मिथक है और पूरी तरह से सच नहीं है। कैंसर के वर्तमान उपचार में सुधार हुआ है, अर्थात, अब ऐसे उपचार होते हैं, जिससे कैंसर पूरी तरह से ठीक हो जाता है।

हालांकि, यह जटिल विषय है क्योंकि “विभिन्न कैंसर प्रकारों में ठीक होने की क्षमता अलग-अलग होती है, और विभिन्न कैंसर प्रकारों में अलग-अलग समय के फ्रेम भी होते हैं जिनमें एक कैंसर पुन: उत्पन्न हो सकता है। रोगियों के लिए यह जानना बहुत मुश्किल हो जाता है कि वे कब ठीक हो सकते हैं या ठीक होने के बाद भी उनमें अभी भी कैंसर की पुनरावृत्ति होने का खतरा है की नही।

कैंसर के बेहतर उपचार और वैज्ञानिक प्रगति के साथ हम यह कह सकते हैं की आने वाले समय में कैंसर के जोखिम और निदान के बारे में लोगों में जागरूकता आने के साथ, यह कथन ‘कैंसर हमेशा वापस आता है’ एक मिथक साबित होगा।

10. कैंसर का कोई इलाज नहीं है ?

यह भी एक मिथक है। जैसे-जैसे चिकित्सा विज्ञान कैंसर के पीछे के तंत्र में गहराई तक पहुंचता जा रहा है, वैसे-वैसे इसके उपचार में सफलता मिलने लगी है।

कुछ कैंसर, जैसे कि वृषण और थायरॉयड कैंसर के मामले में औसतन 60% विश्वसनीय इलाज है यानी 60% मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। इसी तरह स्तन, प्रोस्टेट और मूत्राशय कैन्सर के लगभग 50% मरीज़ भी पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं।

जैसा कि उपरोक्त आंकड़ों द्वारा देखा जा सकता है, कुछ कैंसर का इलाज किया जा सकता है। लेकिन, दुर्भाग्य से, सभी कैंसर पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकते हैं। हमें उम्मीद है कि बेहतर रीसर्च की वजह से आने वाले समय में सभी तरह के कैन्सर का इलाज खोज लिया जाएगा।

जिन रोगियों में कैंसर का पता चलता है, यहां तक ​​कि advanced stage में भी, अगर वो उम्मीद नहीं खोते हैं, तो कई प्रभावी इलाज है जैसे novel therapies, साथ ही साथ अधिक प्रभावी सर्जिकल तकनीकें। एक अच्छा उदाहरण आधुनिक इम्यूनोथेरेपी को मान सकते हैं जिससे stage 4 melanoma वाले 40% तक रोगी ठीक हो जाते हैं। इसी तरह Liver के स्टेज 4 कोलन कैंसर वाले 50% रोगियों को कीमोथेरेपी और सर्जरी के संयोजन से ठीक किया जा सकता है।

आशा करते हैं, की आप भी कैन्सर से जुड़ी इन भ्रांतियो के बारे में जागरूक होंगे.

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